अध्याय 2, श्लोक 53
अध्याय 2: Mahiṣāsura-Sainya Vadha — महिषासुरसैन्यवधनाशयन्तोऽसुरगणान् देवीशक्त्युपबृंहिताः । अवादयन्त पटहान् गणाः शङ्खांस्तथापरे ॥
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लिप्यंतरण
nāśayanto'suragaṇān devīśaktyupabṛṃhitāḥ avādayanta paṭahān gaṇāḥ śaṅkhāṃstathāpare
अर्थ
देवी की शक्ति से पुष्ट होकर वे असुर-गणों का नाश करने लगे। उन गणों में कुछ ने नगाड़े बजाए, कुछ ने शंख,
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
दुर्गा सप्तशती 2.53 का अर्थ क्या है?▼
देवी की शक्ति से पुष्ट होकर वे असुर-गणों का नाश करने लगे। उन गणों में कुछ ने नगाड़े बजाए, कुछ ने शंख,
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?▼
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 2 (Mahiṣāsura-Sainya Vadha — महिषासुर की सेना का वध) का 53वाँ श्लोक है।