अध्याय 2, श्लोक 51
अध्याय 2: Mahiṣāsura-Sainya Vadha — महिषासुरसैन्यवधचचारासुरसैन्येषु वनेष्विव हुताशनः । निःश्वासान् मुमुचे यांश्च युध्यमाना रणेऽम्बिका ॥
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लिप्यंतरण
cacārāsurasainyeṣu vaneṣviva hutāśanaḥ niḥśvāsān mumuce yāṃśca yudhyamānā raṇe'mbikā
अर्थ
असुर-सेनाओं में वन में अग्नि के समान विचरने लगा। और युद्ध करती हुई अम्बिका ने जो निःश्वास छोड़े,
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
दुर्गा सप्तशती 2.51 का अर्थ क्या है?▼
असुर-सेनाओं में वन में अग्नि के समान विचरने लगा। और युद्ध करती हुई अम्बिका ने जो निःश्वास छोड़े,
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?▼
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 2 (Mahiṣāsura-Sainya Vadha — महिषासुर की सेना का वध) का 51वाँ श्लोक है।