अध्याय 2, श्लोक 50
अध्याय 2: Mahiṣāsura-Sainya Vadha — महिषासुरसैन्यवधमुमोचासुरदेहेषु शस्त्राण्यस्त्राणि चेश्वरी । सोऽपि क्रुद्धो धुतसटो देव्या वाहनकेसरी ॥
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लिप्यंतरण
mumocāsuradeheṣu śastrāṇyastrāṇi ceśvarī so'pi kruddho dhutasaṭo devyā vāhanakesarī
अर्थ
ईश्वरी ने असुरों के शरीरों पर शस्त्र-अस्त्र चलाए। और देवी का वाहन वह सिंह भी क्रोध से अयाल झटकता हुआ,
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
दुर्गा सप्तशती 2.50 का अर्थ क्या है?▼
ईश्वरी ने असुरों के शरीरों पर शस्त्र-अस्त्र चलाए। और देवी का वाहन वह सिंह भी क्रोध से अयाल झटकता हुआ,
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?▼
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 2 (Mahiṣāsura-Sainya Vadha — महिषासुर की सेना का वध) का 50वाँ श्लोक है।