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दुर्गा सप्तशती 2.49

अध्याय 2, श्लोक 49

अध्याय 2: Mahiṣāsura-Sainya Vadhaमहिषासुरसैन्यवध

लीलयैव प्रचिच्छेद निजशस्त्रास्त्रवर्षिणी अनायस्तानना देवी स्तूयमाना सुरर्षिभिः

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लिप्यंतरण

līlayaiva praciccheda nijaśastrāstravarṣiṇī anāyastānanā devī stūyamānā surarṣibhiḥ

अर्थ

उनके शस्त्रों-अस्त्रों को मानो खेल-खेल में ही काट डालती रहीं। देवों और ऋषियों द्वारा स्तुति की जाती हुई, अनायास प्रसन्न मुख वाली देवी,

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दुर्गा सप्तशती 2.49 का अर्थ क्या है?
उनके शस्त्रों-अस्त्रों को मानो खेल-खेल में ही काट डालती रहीं। देवों और ऋषियों द्वारा स्तुति की जाती हुई, अनायास प्रसन्न मुख वाली देवी,
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 2 (Mahiṣāsura-Sainya Vadha — महिषासुर की सेना का वध) का 49वाँ श्लोक है।