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दुर्गा सप्तशती 2.48

अध्याय 2, श्लोक 48

अध्याय 2: Mahiṣāsura-Sainya Vadhaमहिषासुरसैन्यवध

देवीं खड्गप्रहारैस्तु ते तां हन्तुं प्रचक्रमुः सापि देवी ततस्तानि शस्त्राण्यस्त्राणि चण्डिका

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लिप्यंतरण

devīṃ khaḍgaprahāraistu te tāṃ hantuṃ pracakramuḥ sāpi devī tatastāni śastrāṇyastrāṇi caṇḍikā

अर्थ

और वे देवी पर खड्ग-प्रहार करके उन्हें मारने में प्रवृत्त हुए। तब वह देवी चण्डिका अपने शस्त्रों-अस्त्रों की वर्षा करती हुई,

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दुर्गा सप्तशती 2.48 का अर्थ क्या है?
और वे देवी पर खड्ग-प्रहार करके उन्हें मारने में प्रवृत्त हुए। तब वह देवी चण्डिका अपने शस्त्रों-अस्त्रों की वर्षा करती हुई,
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 2 (Mahiṣāsura-Sainya Vadha — महिषासुर की सेना का वध) का 48वाँ श्लोक है।