अध्याय 2, श्लोक 43
अध्याय 2: Mahiṣāsura-Sainya Vadha — महिषासुरसैन्यवधवृतो रथानां कोट्या च युद्धे तस्मिन्नयुध्यत । बिडालाख्योऽयुतानां च पञ्चाशद्भिरथायुतैः ॥
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लिप्यंतरण
vṛto rathānāṃ koṭyā ca yuddhe tasminnayudhyata biḍālākhyo'yutānāṃ ca pañcāśadbhirathāyutaiḥ
अर्थ
और एक करोड़ रथों से घिरे हुए वे उस युद्ध में लड़े। बिडाल नामक असुर पाँच सौ करोड़ रथों से घिरा हुआ वहाँ युद्ध में लड़ा;
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
दुर्गा सप्तशती 2.43 का अर्थ क्या है?▼
और एक करोड़ रथों से घिरे हुए वे उस युद्ध में लड़े। बिडाल नामक असुर पाँच सौ करोड़ रथों से घिरा हुआ वहाँ युद्ध में लड़ा;
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?▼
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 2 (Mahiṣāsura-Sainya Vadha — महिषासुर की सेना का वध) का 43वाँ श्लोक है।