अध्याय 2, श्लोक 44
अध्याय 2: Mahiṣāsura-Sainya Vadha — महिषासुरसैन्यवधयुयुधे संयुगे तत्र रथानां परिवारितः । अन्ये च तत्रायुतशो रथनागहयैर्वृताः ॥
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लिप्यंतरण
yuyudhe saṃyuge tatra rathānāṃ parivāritaḥ anye ca tatrāyutaśo rathanāgahayairvṛtāḥ
अर्थ
और वहाँ अन्य असुर भी अयुतों (असंख्य) की संख्या में, रथों, हाथियों व घोड़ों से घिरे हुए,
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
दुर्गा सप्तशती 2.44 का अर्थ क्या है?▼
और वहाँ अन्य असुर भी अयुतों (असंख्य) की संख्या में, रथों, हाथियों व घोड़ों से घिरे हुए,
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?▼
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 2 (Mahiṣāsura-Sainya Vadha — महिषासुर की सेना का वध) का 44वाँ श्लोक है।