Mantra.Tips
दुर्गा सप्तशती 2.40

अध्याय 2, श्लोक 40

अध्याय 2: Mahiṣāsura-Sainya Vadhaमहिषासुरसैन्यवध

युयुधे चामरश्चान्यैश्चतुरङ्गबलान्वितः रथानामयुतैः षड्भिरुदग्राख्यो महासुरः

🔊 किसी भी शब्द को सुनने के लिए टैप करें — या पूरा श्लोक सुनने के लिए ▶ दबाएँ

लिप्यंतरण

yuyudhe cāmaraścānyaiścaturaṅgabalānvitaḥ rathānāmayutaiḥ ṣaḍbhirudagrākhyo mahāsuraḥ

अर्थ

तथा चामर, चतुरंगिणी सेना से युक्त होकर, और अन्य असुर लड़ने लगे; साठ हज़ार रथों वाला उदग्र नामक महान् असुर,

इस श्लोक को साझा करें
Share:

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दुर्गा सप्तशती 2.40 का अर्थ क्या है?
तथा चामर, चतुरंगिणी सेना से युक्त होकर, और अन्य असुर लड़ने लगे; साठ हज़ार रथों वाला उदग्र नामक महान् असुर,
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 2 (Mahiṣāsura-Sainya Vadha — महिषासुर की सेना का वध) का 40वाँ श्लोक है।