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दुर्गा सप्तशती 2.39

अध्याय 2, श्लोक 39

अध्याय 2: Mahiṣāsura-Sainya Vadhaमहिषासुरसैन्यवध

शस्त्रास्त्रैर्बहुधा मुक्तैरादीपितदिगन्तरम् महिषासुरसेनानीश्चिक्षुराख्यो महासुरः

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लिप्यंतरण

śastrāstrairbahudhā muktairādīpitadigantaram mahiṣāsurasenānīścikṣurākhyo mahāsuraḥ

अर्थ

जिसमें बहुत प्रकार से छोड़े गए शस्त्रों-अस्त्रों से दिशाएँ प्रकाशित हो उठीं। महिषासुर की सेना का सेनापति चिक्षुर नामक महान् असुर,

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दुर्गा सप्तशती 2.39 का अर्थ क्या है?
जिसमें बहुत प्रकार से छोड़े गए शस्त्रों-अस्त्रों से दिशाएँ प्रकाशित हो उठीं। महिषासुर की सेना का सेनापति चिक्षुर नामक महान् असुर,
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 2 (Mahiṣāsura-Sainya Vadha — महिषासुर की सेना का वध) का 39वाँ श्लोक है।