अध्याय 2, श्लोक 38
अध्याय 2: Mahiṣāsura-Sainya Vadha — महिषासुरसैन्यवधदिशो भुजसहस्रेण समन्ताद्व्याप्य संस्थिताम् । ततः प्रववृते युद्धं तया देव्या सुरद्विषाम् ॥
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लिप्यंतरण
diśo bhujasahasreṇa samantādvyāpya saṃsthitām tataḥ pravavṛte yuddhaṃ tayā devyā suradviṣām
अर्थ
और अपनी सहस्र भुजाओं से चारों ओर समस्त दिशाओं को व्याप्त कर खड़ी थीं। तब उस देवी और देवद्रोहियों में युद्ध आरम्भ हुआ,
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
दुर्गा सप्तशती 2.38 का अर्थ क्या है?▼
और अपनी सहस्र भुजाओं से चारों ओर समस्त दिशाओं को व्याप्त कर खड़ी थीं। तब उस देवी और देवद्रोहियों में युद्ध आरम्भ हुआ,
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?▼
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 2 (Mahiṣāsura-Sainya Vadha — महिषासुर की सेना का वध) का 38वाँ श्लोक है।