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दुर्गा सप्तशती 2.36

अध्याय 2, श्लोक 36

अध्याय 2: Mahiṣāsura-Sainya Vadhaमहिषासुरसैन्यवध

अभ्यधावत तं शब्दमशेषैरसुरैर्वृतः ददर्श ततो देवीं व्याप्तलोकत्रयां त्विषा

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लिप्यंतरण

abhyadhāvata taṃ śabdamaśeṣairasurairvṛtaḥ sa dadarśa tato devīṃ vyāptalokatrayāṃ tviṣā

अर्थ

समस्त असुरों से घिरा हुआ उस शब्द की ओर दौड़ा। तब उसने उन देवी को देखा, जो अपनी कांति से तीनों लोकों में व्याप्त थीं,

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दुर्गा सप्तशती 2.36 का अर्थ क्या है?
समस्त असुरों से घिरा हुआ उस शब्द की ओर दौड़ा। तब उसने उन देवी को देखा, जो अपनी कांति से तीनों लोकों में व्याप्त थीं,
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 2 (Mahiṣāsura-Sainya Vadha — महिषासुर की सेना का वध) का 36वाँ श्लोक है।