अध्याय 2, श्लोक 34
अध्याय 2: Mahiṣāsura-Sainya Vadha — महिषासुरसैन्यवधतुष्टुवुर्मुनयश्चैनां भक्तिनम्रात्ममूर्तयः । दृष्ट्वा समस्तं सङ्क्षुब्धं त्रैलोक्यममरारयः ॥
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लिप्यंतरण
tuṣṭuvurmunayaścaināṃ bhaktinamrātmamūrtayaḥ dṛṣṭvā samastaṃ saṅkṣubdhaṃ trailokyamamarārayaḥ
अर्थ
भक्ति से नम्र शरीर वाले मुनियों ने उनकी स्तुति की। समस्त त्रैलोक्य को क्षुब्ध देखकर देवद्रोही असुरों ने,
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
दुर्गा सप्तशती 2.34 का अर्थ क्या है?▼
भक्ति से नम्र शरीर वाले मुनियों ने उनकी स्तुति की। समस्त त्रैलोक्य को क्षुब्ध देखकर देवद्रोही असुरों ने,
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?▼
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 2 (Mahiṣāsura-Sainya Vadha — महिषासुर की सेना का वध) का 34वाँ श्लोक है।