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दुर्गा सप्तशती 2.33

अध्याय 2, श्लोक 33

अध्याय 2: Mahiṣāsura-Sainya Vadhaमहिषासुरसैन्यवध

चचाल वसुधा चेलुः सकलाश्च महीधराः जयेति देवाश्च मुदा तामूचुः सिंहवाहिनीम्

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लिप्यंतरण

cacāla vasudhā celuḥ sakalāśca mahīdharāḥ jayeti devāśca mudā tāmūcuḥ siṃhavāhinīm

अर्थ

पृथ्वी डोल उठी और सब पर्वत हिल उठे। देवताओं ने हर्ष से सिंहवाहिनी देवी से 'जय हो' कहा।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दुर्गा सप्तशती 2.33 का अर्थ क्या है?
पृथ्वी डोल उठी और सब पर्वत हिल उठे। देवताओं ने हर्ष से सिंहवाहिनी देवी से 'जय हो' कहा।
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 2 (Mahiṣāsura-Sainya Vadha — महिषासुर की सेना का वध) का 33वाँ श्लोक है।