अध्याय 2, श्लोक 32
अध्याय 2: Mahiṣāsura-Sainya Vadha — महिषासुरसैन्यवधअमायतातिमहता प्रतिशब्दो महानभूत् । चुक्षुभुः सकला लोकाः समुद्राश्च चकम्पिरे ॥
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लिप्यंतरण
amāyatātimahatā pratiśabdo mahānabhūt cukṣubhuḥ sakalā lokāḥ samudrāśca cakampire
अर्थ
और एक अत्यंत विशाल प्रतिध्वनि उठी। समस्त लोक क्षुब्ध हो उठे और समुद्र काँप उठे;
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
दुर्गा सप्तशती 2.32 का अर्थ क्या है?▼
और एक अत्यंत विशाल प्रतिध्वनि उठी। समस्त लोक क्षुब्ध हो उठे और समुद्र काँप उठे;
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?▼
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 2 (Mahiṣāsura-Sainya Vadha — महिषासुर की सेना का वध) का 32वाँ श्लोक है।