अध्याय 2, श्लोक 31
अध्याय 2: Mahiṣāsura-Sainya Vadha — महिषासुरसैन्यवधसम्मानिता ननादोच्चैः साट्टहासं मुहुर्मुहुः । तस्या नादेन घोरेण कृत्स्नमापूरितं नभः ॥
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लिप्यंतरण
sammānitā nanādoccaiḥ sāṭṭahāsaṃ muhurmuhuḥ tasyā nādena ghoreṇa kṛtsnamāpūritaṃ nabhaḥ
अर्थ
बारंबार अट्टहास करती हुई ऊँचे स्वर में गरजीं। उनके भयंकर नाद से सम्पूर्ण आकाश भर गया,
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
दुर्गा सप्तशती 2.31 का अर्थ क्या है?▼
बारंबार अट्टहास करती हुई ऊँचे स्वर में गरजीं। उनके भयंकर नाद से सम्पूर्ण आकाश भर गया,
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?▼
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 2 (Mahiṣāsura-Sainya Vadha — महिषासुर की सेना का वध) का 31वाँ श्लोक है।