अध्याय 2, श्लोक 30
अध्याय 2: Mahiṣāsura-Sainya Vadha — महिषासुरसैन्यवधनागहारं ददौ तस्यै धत्ते यः पृथिवीमिमाम् । अन्यैरपि सुरैर्देवी भूषणैरायुधैस्तथा ॥
🔊 किसी भी शब्द को सुनने के लिए टैप करें — या पूरा श्लोक सुनने के लिए ▶ दबाएँ
लिप्यंतरण
nāgahāraṃ dadau tasyai dhatte yaḥ pṛthivīmimām anyairapi surairdevī bhūṣaṇairāyudhaistathā
अर्थ
महामणियों से विभूषित एक नागहार दिया। इस प्रकार इन तथा अन्य देवताओं द्वारा भी आभूषणों और आयुधों से सम्मानित होकर देवी,
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
दुर्गा सप्तशती 2.30 का अर्थ क्या है?▼
महामणियों से विभूषित एक नागहार दिया। इस प्रकार इन तथा अन्य देवताओं द्वारा भी आभूषणों और आयुधों से सम्मानित होकर देवी,
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?▼
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 2 (Mahiṣāsura-Sainya Vadha — महिषासुर की सेना का वध) का 30वाँ श्लोक है।