अध्याय 2, श्लोक 3
अध्याय 2: Mahiṣāsura-Sainya Vadha — महिषासुरसैन्यवधततः पराजिता देवाः पद्मयोनिं प्रजापतिम् । पुरस्कृत्य गतास्तत्र यत्रेशगरुडध्वजौ ॥
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लिप्यंतरण
tataḥ parājitā devāḥ padmayoniṃ prajāpatim puraskṛtya gatāstatra yatreśagaruḍadhvajau
अर्थ
तब पराजित देवता कमल से उत्पन्न प्रजापति ब्रह्मा को आगे करके वहाँ गए जहाँ शिव (ईश) और गरुड़ध्वज विष्णु विराजमान थे।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
दुर्गा सप्तशती 2.3 का अर्थ क्या है?▼
तब पराजित देवता कमल से उत्पन्न प्रजापति ब्रह्मा को आगे करके वहाँ गए जहाँ शिव (ईश) और गरुड़ध्वज विष्णु विराजमान थे।
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?▼
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 2 (Mahiṣāsura-Sainya Vadha — महिषासुर की सेना का वध) का 3वाँ श्लोक है।