अध्याय 2, श्लोक 2
अध्याय 2: Mahiṣāsura-Sainya Vadha — महिषासुरसैन्यवधतत्रासुरैर्महावीर्यैर्देवसैन्यं पराजितम् । जित्वा च सकलान् देवानिन्द्रोऽभून्महिषासुरः ॥
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लिप्यंतरण
tatrāsurairmahāvīryairdevasainyaṃ parājitam jitvā ca sakalān devānindro'bhūnmahiṣāsuraḥ
अर्थ
उसमें महावीर्यवान् असुरों ने देवसेना को परास्त कर दिया; और समस्त देवताओं को जीतकर महिषासुर स्वयं इन्द्र (स्वर्ग का स्वामी) बन बैठा।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
दुर्गा सप्तशती 2.2 का अर्थ क्या है?▼
उसमें महावीर्यवान् असुरों ने देवसेना को परास्त कर दिया; और समस्त देवताओं को जीतकर महिषासुर स्वयं इन्द्र (स्वर्ग का स्वामी) बन बैठा।
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?▼
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 2 (Mahiṣāsura-Sainya Vadha — महिषासुर की सेना का वध) का 2वाँ श्लोक है।