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दुर्गा सप्तशती 2.1

अध्याय 2, श्लोक 1

अध्याय 2: Mahiṣāsura-Sainya Vadhaमहिषासुरसैन्यवध

ह्रीं ऋषिरुवाच देवासुरमभूद्युद्धं पूर्णमब्दशतं पुरा महिषेऽसुराणामधिपे देवानां पुरन्दरे

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लिप्यंतरण

oṃ hrīṃ ṛṣiruvāca devāsuramabhūdyuddhaṃ pūrṇamabdaśataṃ purā mahiṣe'surāṇāmadhipe devānāṃ ca purandare

अर्थ

(ॐ ह्रीं। ऋषि बोले —) प्राचीन काल में जब महिषासुर असुरों का स्वामी और इन्द्र देवताओं का अधिपति था, तब देवताओं और असुरों में पूरे सौ वर्षों तक युद्ध हुआ।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दुर्गा सप्तशती 2.1 का अर्थ क्या है?
(ॐ ह्रीं। ऋषि बोले —) प्राचीन काल में जब महिषासुर असुरों का स्वामी और इन्द्र देवताओं का अधिपति था, तब देवताओं और असुरों में पूरे सौ वर्षों तक युद्ध हुआ।
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 2 (Mahiṣāsura-Sainya Vadha — महिषासुर की सेना का वध) का 1वाँ श्लोक है।