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दुर्गा सप्तशती 2.27

अध्याय 2, श्लोक 27

अध्याय 2: Mahiṣāsura-Sainya Vadhaमहिषासुरसैन्यवध

अस्त्राण्यनेकरूपाणि तथाभेद्यं दंशनम् अम्लानपङ्कजां मालां शिरस्युरसि चापराम्

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लिप्यंतरण

astrāṇyanekarūpāṇi tathābhedyaṃ ca daṃśanam amlānapaṅkajāṃ mālāṃ śirasyurasi cāparām

अर्थ

अनेक प्रकार के अस्त्र और अभेद्य कवच दिया। समुद्र (जलधि) ने सिर और वक्षःस्थल के लिए कभी न मुरझाने वाले कमलों की दो मालाएँ,

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दुर्गा सप्तशती 2.27 का अर्थ क्या है?
अनेक प्रकार के अस्त्र और अभेद्य कवच दिया। समुद्र (जलधि) ने सिर और वक्षःस्थल के लिए कभी न मुरझाने वाले कमलों की दो मालाएँ,
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 2 (Mahiṣāsura-Sainya Vadha — महिषासुर की सेना का वध) का 27वाँ श्लोक है।