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दुर्गा सप्तशती 2.25

अध्याय 2, श्लोक 25

अध्याय 2: Mahiṣāsura-Sainya Vadhaमहिषासुरसैन्यवध

अर्धचन्द्रं तथा शुभ्रं केयूरान् सर्वबाहुषु नूपुरौ विमलौ तद्वद् ग्रैवेयकमनुत्तमम्

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लिप्यंतरण

ardhacandraṃ tathā śubhraṃ keyūrān sarvabāhuṣu nūpurau vimalau tadvad graiveyakamanuttamam

अर्थ

एक उज्ज्वल अर्धचन्द्र, सब बाँहों के लिए केयूर, दो निर्मल नूपुर और एक अनुपम ग्रैवेयक (कण्ठहार) दिया;

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दुर्गा सप्तशती 2.25 का अर्थ क्या है?
एक उज्ज्वल अर्धचन्द्र, सब बाँहों के लिए केयूर, दो निर्मल नूपुर और एक अनुपम ग्रैवेयक (कण्ठहार) दिया;
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 2 (Mahiṣāsura-Sainya Vadha — महिषासुर की सेना का वध) का 25वाँ श्लोक है।