अध्याय 2, श्लोक 24
अध्याय 2: Mahiṣāsura-Sainya Vadha — महिषासुरसैन्यवधक्षीरोदश्चामलं हारमजरे च तथाम्बरे । चूडामणिं तथा दिव्यं कुण्डले कटकानि च ॥
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लिप्यंतरण
kṣīrodaścāmalaṃ hāramajare ca tathāmbare cūḍāmaṇiṃ tathā divyaṃ kuṇḍale kaṭakāni ca
अर्थ
क्षीरसागर ने निर्मल हार, कभी पुराने न होने वाले दो वस्त्र, दिव्य चूड़ामणि, कुण्डल और कंगन दिए;
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
दुर्गा सप्तशती 2.24 का अर्थ क्या है?▼
क्षीरसागर ने निर्मल हार, कभी पुराने न होने वाले दो वस्त्र, दिव्य चूड़ामणि, कुण्डल और कंगन दिए;
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?▼
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 2 (Mahiṣāsura-Sainya Vadha — महिषासुर की सेना का वध) का 24वाँ श्लोक है।