अध्याय 2, श्लोक 23
अध्याय 2: Mahiṣāsura-Sainya Vadha — महिषासुरसैन्यवधसमस्तरोमकूपेषु निजरश्मीन् दिवाकरः । कालश्च दत्तवान् खड्गं तस्यै चर्म च निर्मलम् ॥
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लिप्यंतरण
samastaromakūpeṣu nijaraśmīn divākaraḥ kālaśca dattavān khaḍgaṃ tasyai carma ca nirmalam
अर्थ
सूर्य (दिवाकर) ने उनके समस्त रोमकूपों में अपनी किरणें प्रदान कीं; और काल ने खड्ग तथा निर्मल चर्म (ढाल) दिया।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
दुर्गा सप्तशती 2.23 का अर्थ क्या है?▼
सूर्य (दिवाकर) ने उनके समस्त रोमकूपों में अपनी किरणें प्रदान कीं; और काल ने खड्ग तथा निर्मल चर्म (ढाल) दिया।
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?▼
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 2 (Mahiṣāsura-Sainya Vadha — महिषासुर की सेना का वध) का 23वाँ श्लोक है।