अध्याय 2, श्लोक 21
अध्याय 2: Mahiṣāsura-Sainya Vadha — महिषासुरसैन्यवधवज्रमिन्द्रः समुत्पाट्य कुलिशादमराधिपः । ददौ तस्यै सहस्राक्षो घण्टामैरावताद्गजात् ॥
🔊 किसी भी शब्द को सुनने के लिए टैप करें — या पूरा श्लोक सुनने के लिए ▶ दबाएँ
लिप्यंतरण
vajramindraḥ samutpāṭya kuliśādamarādhipaḥ dadau tasyai sahasrākṣo ghaṇṭāmairāvatādgajāt
अर्थ
सहस्राक्ष इन्द्र, देवराज, ने अपने वज्र (कुलिश) से वज्र निकालकर उन्हें दिया, और ऐरावत हाथी से एक घण्टा दिया।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
दुर्गा सप्तशती 2.21 का अर्थ क्या है?▼
सहस्राक्ष इन्द्र, देवराज, ने अपने वज्र (कुलिश) से वज्र निकालकर उन्हें दिया, और ऐरावत हाथी से एक घण्टा दिया।
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?▼
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 2 (Mahiṣāsura-Sainya Vadha — महिषासुर की सेना का वध) का 21वाँ श्लोक है।