अध्याय 2, श्लोक 20
अध्याय 2: Mahiṣāsura-Sainya Vadha — महिषासुरसैन्यवधशङ्खं च वरुणः शक्तिं ददौ तस्यै हुताशनः । मारुतो दत्तवांश्चापं बाणपूर्णे तथेषुधी ॥
🔊 किसी भी शब्द को सुनने के लिए टैप करें — या पूरा श्लोक सुनने के लिए ▶ दबाएँ
लिप्यंतरण
śaṅkhaṃ ca varuṇaḥ śaktiṃ dadau tasyai hutāśanaḥ māruto dattavāṃścāpaṃ bāṇapūrṇe tatheṣudhī
अर्थ
वरुण ने शंख, अग्नि (हुताशन) ने शक्ति, और वायु (मरुत्) ने धनुष तथा बाणों से भरे दो तरकश दिए।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
दुर्गा सप्तशती 2.20 का अर्थ क्या है?▼
वरुण ने शंख, अग्नि (हुताशन) ने शक्ति, और वायु (मरुत्) ने धनुष तथा बाणों से भरे दो तरकश दिए।
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?▼
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 2 (Mahiṣāsura-Sainya Vadha — महिषासुर की सेना का वध) का 20वाँ श्लोक है।