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दुर्गा सप्तशती 2.19

अध्याय 2, श्लोक 19

अध्याय 2: Mahiṣāsura-Sainya Vadhaमहिषासुरसैन्यवध

शूलं शूलाद्विनिष्कृष्य ददौ तस्यै पिनाकधृक् चक्रं दत्तवान् कृष्णः समुत्पाट्य स्वचक्रतः

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लिप्यंतरण

śūlaṃ śūlādviniṣkṛṣya dadau tasyai pinākadhṛk cakraṃ ca dattavān kṛṣṇaḥ samutpāṭya svacakrataḥ

अर्थ

पिनाकधारी शिव ने अपने त्रिशूल से एक त्रिशूल निकालकर उन्हें दिया; और कृष्ण (विष्णु) ने अपने चक्र से चक्र निकालकर दिया।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दुर्गा सप्तशती 2.19 का अर्थ क्या है?
पिनाकधारी शिव ने अपने त्रिशूल से एक त्रिशूल निकालकर उन्हें दिया; और कृष्ण (विष्णु) ने अपने चक्र से चक्र निकालकर दिया।
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 2 (Mahiṣāsura-Sainya Vadha — महिषासुर की सेना का वध) का 19वाँ श्लोक है।