Mantra.Tips
दुर्गा सप्तशती 2.18

अध्याय 2, श्लोक 18

अध्याय 2: Mahiṣāsura-Sainya Vadhaमहिषासुरसैन्यवध

ततः समस्तदेवानां तेजोराशिसमुद्भवाम् तां विलोक्य मुदं प्रापुरमरा महिषार्दिताः ततो देवा ददुस्तस्यै स्वानि स्वान्यायुधानि

🔊 किसी भी शब्द को सुनने के लिए टैप करें — या पूरा श्लोक सुनने के लिए ▶ दबाएँ

लिप्यंतरण

tataḥ samastadevānāṃ tejorāśisamudbhavām tāṃ vilokya mudaṃ prāpuramarā mahiṣārditāḥ tato devā dadustasyai svāni svānyāyudhāni ca

अर्थ

तब समस्त देवताओं के तेज-पुंज से उत्पन्न उन देवी को देखकर महिष से पीड़ित अमर हर्षित हुए। तब देवताओं ने उन्हें अपने-अपने आयुध दिए।

इस श्लोक को साझा करें
Share:

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दुर्गा सप्तशती 2.18 का अर्थ क्या है?
तब समस्त देवताओं के तेज-पुंज से उत्पन्न उन देवी को देखकर महिष से पीड़ित अमर हर्षित हुए। तब देवताओं ने उन्हें अपने-अपने आयुध दिए।
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 2 (Mahiṣāsura-Sainya Vadha — महिषासुर की सेना का वध) का 18वाँ श्लोक है।