अध्याय 2, श्लोक 17
अध्याय 2: Mahiṣāsura-Sainya Vadha — महिषासुरसैन्यवधभ्रुवौ च सन्ध्ययोस्तेजः श्रवणावनिलस्य च । अन्येषां चैव देवानां सम्भवस्तेजसां शिवा ॥
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लिप्यंतरण
bhruvau ca sandhyayostejaḥ śravaṇāvanilasya ca anyeṣāṃ caiva devānāṃ sambhavastejasāṃ śivā
अर्थ
उनकी दोनों भौंहें दोनों संध्याओं के तेज से, और कान वायु (अनिल) के तेज से बने; अन्य देवताओं के तेज का प्रकट होना भी कल्याणकारी हुआ।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
दुर्गा सप्तशती 2.17 का अर्थ क्या है?▼
उनकी दोनों भौंहें दोनों संध्याओं के तेज से, और कान वायु (अनिल) के तेज से बने; अन्य देवताओं के तेज का प्रकट होना भी कल्याणकारी हुआ।
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?▼
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 2 (Mahiṣāsura-Sainya Vadha — महिषासुर की सेना का वध) का 17वाँ श्लोक है।