अध्याय 2, श्लोक 16
अध्याय 2: Mahiṣāsura-Sainya Vadha — महिषासुरसैन्यवधतस्यास्तु दन्ताः सम्भूताः प्राजापत्येन तेजसा । नयनत्रितयं जज्ञे तथा पावकतेजसा ॥
🔊 किसी भी शब्द को सुनने के लिए टैप करें — या पूरा श्लोक सुनने के लिए ▶ दबाएँ
लिप्यंतरण
tasyāstu dantāḥ sambhūtāḥ prājāpatyena tejasā nayanatritayaṃ jajñe tathā pāvakatejasā
अर्थ
उनके दाँत प्रजापति के तेज से बने; और उनके तीन नेत्र अग्नि (पावक) के तेज से उत्पन्न हुए;
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
दुर्गा सप्तशती 2.16 का अर्थ क्या है?▼
उनके दाँत प्रजापति के तेज से बने; और उनके तीन नेत्र अग्नि (पावक) के तेज से उत्पन्न हुए;
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?▼
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 2 (Mahiṣāsura-Sainya Vadha — महिषासुर की सेना का वध) का 16वाँ श्लोक है।