अध्याय 2, श्लोक 15
अध्याय 2: Mahiṣāsura-Sainya Vadha — महिषासुरसैन्यवधब्रह्मणस्तेजसा पादौ तदङ्गुल्योऽर्कतेजसा । वसूनां च कराङ्गुल्यः कौबेरेण च नासिका ॥
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लिप्यंतरण
brahmaṇastejasā pādau tadaṅgulyo'rkatejasā vasūnāṃ ca karāṅgulyaḥ kaubereṇa ca nāsikā
अर्थ
ब्रह्मा के तेज से चरण; सूर्य (अर्क) के तेज से पैरों की अँगुलियाँ; वसुओं के तेज से हाथों की अँगुलियाँ; और कुबेर के तेज से नासिका बनी;
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
दुर्गा सप्तशती 2.15 का अर्थ क्या है?▼
ब्रह्मा के तेज से चरण; सूर्य (अर्क) के तेज से पैरों की अँगुलियाँ; वसुओं के तेज से हाथों की अँगुलियाँ; और कुबेर के तेज से नासिका बनी;
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?▼
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 2 (Mahiṣāsura-Sainya Vadha — महिषासुर की सेना का वध) का 15वाँ श्लोक है।