अध्याय 2, श्लोक 14
अध्याय 2: Mahiṣāsura-Sainya Vadha — महिषासुरसैन्यवधसौम्येन स्तनयोर्युग्मं मध्यं चैन्द्रेण चाभवत् । वारुणेन च जङ्घोरू नितम्बस्तेजसा भुवः ॥
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लिप्यंतरण
saumyena stanayoryugmaṃ madhyaṃ caindreṇa cābhavat vāruṇena ca jaṅghorū nitambastejasā bhuvaḥ
अर्थ
चन्द्रमा (सौम्य) के तेज से दोनों स्तन; इन्द्र (ऐन्द्र) के तेज से कटि; वरुण के तेज से जंघा व ऊरु; और पृथ्वी के तेज से नितम्ब बने;
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
दुर्गा सप्तशती 2.14 का अर्थ क्या है?▼
चन्द्रमा (सौम्य) के तेज से दोनों स्तन; इन्द्र (ऐन्द्र) के तेज से कटि; वरुण के तेज से जंघा व ऊरु; और पृथ्वी के तेज से नितम्ब बने;
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?▼
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 2 (Mahiṣāsura-Sainya Vadha — महिषासुर की सेना का वध) का 14वाँ श्लोक है।