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दुर्गा सप्तशती 2.13

अध्याय 2, श्लोक 13

अध्याय 2: Mahiṣāsura-Sainya Vadhaमहिषासुरसैन्यवध

यदभूच्छाम्भवं तेजस्तेनाजायत तन्मुखम् याम्येन चाभवन् केशा बाहवो विष्णुतेजसा

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लिप्यंतरण

yadabhūcchāmbhavaṃ tejastenājāyata tanmukham yāmyena cābhavan keśā bāhavo viṣṇutejasā

अर्थ

जो शिव (शाम्भव) का तेज था, उससे उनका मुख बना; यम के तेज से केश, और विष्णु के तेज से भुजाएँ बनीं;

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दुर्गा सप्तशती 2.13 का अर्थ क्या है?
जो शिव (शाम्भव) का तेज था, उससे उनका मुख बना; यम के तेज से केश, और विष्णु के तेज से भुजाएँ बनीं;
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 2 (Mahiṣāsura-Sainya Vadha — महिषासुर की सेना का वध) का 13वाँ श्लोक है।