अध्याय 13, श्लोक 8
अध्याय 13: Suratha-Vaiśyayor Varapradāna — सुरथवैश्ययोर्वरप्रदानस च वैश्यस्तपस्तेपे देवीसूक्तं परं जपन् । तौ तस्मिन् पुलिने देव्याः कृत्वा मूर्तिं महीमयीम् ॥
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लिप्यंतरण
sa ca vaiśyastapastepe devīsūktaṃ paraṃ japan tau tasmin puline devyāḥ kṛtvā mūrtiṃ mahīmayīm
अर्थ
और वह वैश्य परम देवी-सूक्त का जप करते हुए तपस्या करने लगा। उन दोनों ने उस तट पर देवी की मिट्टी की मूर्ति बनाकर,
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
दुर्गा सप्तशती 13.8 का अर्थ क्या है?▼
और वह वैश्य परम देवी-सूक्त का जप करते हुए तपस्या करने लगा। उन दोनों ने उस तट पर देवी की मिट्टी की मूर्ति बनाकर,
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?▼
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 13 (Suratha-Vaiśyayor Varapradāna — सुरथ व वैश्य को वरदान) का 8वाँ श्लोक है।