अध्याय 13, श्लोक 7
अध्याय 13: Suratha-Vaiśyayor Varapradāna — सुरथवैश्ययोर्वरप्रदानजगाम सद्यस्तपसे स च वैश्यो महामुने । सन्दर्शनार्थमम्बाया नदीपुलिनमास्थितः ॥
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लिप्यंतरण
jagāma sadyastapase sa ca vaiśyo mahāmune sandarśanārthamambāyā nadīpulinamāsthitaḥ
अर्थ
तुरन्त तपस्या के लिए चल पड़े; और हे महामुने! वह वैश्य भी अम्बा के दर्शन के लिए नदी के तट पर जा बैठा।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
दुर्गा सप्तशती 13.7 का अर्थ क्या है?▼
तुरन्त तपस्या के लिए चल पड़े; और हे महामुने! वह वैश्य भी अम्बा के दर्शन के लिए नदी के तट पर जा बैठा।
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?▼
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 13 (Suratha-Vaiśyayor Varapradāna — सुरथ व वैश्य को वरदान) का 7वाँ श्लोक है।