अध्याय 13, श्लोक 6
अध्याय 13: Suratha-Vaiśyayor Varapradāna — सुरथवैश्ययोर्वरप्रदानप्रणिपत्य महाभागं तमृषिं संशितव्रतम् । निर्विण्णोऽतिममत्वेन राज्यापहरणेन च ॥
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लिप्यंतरण
praṇipatya mahābhāgaṃ tamṛṣiṃ saṃśitavratam nirviṇṇo'timamatvena rājyāpaharaṇena ca
अर्थ
दृढ़व्रती उन महाभाग ऋषि को प्रणाम करके — अत्यधिक ममता और राज्य के अपहरण से विरक्त होकर —
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
दुर्गा सप्तशती 13.6 का अर्थ क्या है?▼
दृढ़व्रती उन महाभाग ऋषि को प्रणाम करके — अत्यधिक ममता और राज्य के अपहरण से विरक्त होकर —
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?▼
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 13 (Suratha-Vaiśyayor Varapradāna — सुरथ व वैश्य को वरदान) का 6वाँ श्लोक है।