अध्याय 13, श्लोक 5
अध्याय 13: Suratha-Vaiśyayor Varapradāna — सुरथवैश्ययोर्वरप्रदानमार्कण्डेय उवाच इति तस्य वचः श्रुत्वा सुरथः स नराधिपः ॥
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लिप्यंतरण
mārkaṇḍeya uvāca iti tasya vacaḥ śrutvā surathaḥ sa narādhipaḥ
अर्थ
(मार्कण्डेय बोले —) मुनि के ये वचन सुनकर वह नरेश सुरथ,
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
दुर्गा सप्तशती 13.5 का अर्थ क्या है?▼
(मार्कण्डेय बोले —) मुनि के ये वचन सुनकर वह नरेश सुरथ,
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?▼
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 13 (Suratha-Vaiśyayor Varapradāna — सुरथ व वैश्य को वरदान) का 5वाँ श्लोक है।