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दुर्गा सप्तशती 13.4

अध्याय 13, श्लोक 4

अध्याय 13: Suratha-Vaiśyayor Varapradānaसुरथवैश्ययोर्वरप्रदान

आराधिता सैव नृणां भोगस्वर्गापवर्गदा

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लिप्यंतरण

ārādhitā saiva nṛṇāṃ bhogasvargāpavargadā

अर्थ

वही आराधना किए जाने पर मनुष्यों को भोग, स्वर्ग और मोक्ष देने वाली होती हैं।'

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दुर्गा सप्तशती 13.4 का अर्थ क्या है?
वही आराधना किए जाने पर मनुष्यों को भोग, स्वर्ग और मोक्ष देने वाली होती हैं।'
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 13 (Suratha-Vaiśyayor Varapradāna — सुरथ व वैश्य को वरदान) का 4वाँ श्लोक है।