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दुर्गा सप्तशती 13.3

अध्याय 13, श्लोक 3

अध्याय 13: Suratha-Vaiśyayor Varapradānaसुरथवैश्ययोर्वरप्रदान

मोह्यन्ते मोहिताश्चैव मोहमेष्यन्ति चापरे तामुपैहि महाराज शरणं परमेश्वरीम्

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लिप्यंतरण

mohyante mohitāścaiva mohameṣyanti cāpare tāmupaihi mahārāja śaraṇaṃ parameśvarīm

अर्थ

मोहित किए जाते हैं; (कुछ) मोहित हुए हैं, और कुछ अन्य मोह को प्राप्त होंगे। हे महाराज! उन परमेश्वरी की शरण में जाइए।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दुर्गा सप्तशती 13.3 का अर्थ क्या है?
मोहित किए जाते हैं; (कुछ) मोहित हुए हैं, और कुछ अन्य मोह को प्राप्त होंगे। हे महाराज! उन परमेश्वरी की शरण में जाइए।
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 13 (Suratha-Vaiśyayor Varapradāna — सुरथ व वैश्य को वरदान) का 3वाँ श्लोक है।