अध्याय 13, श्लोक 21
अध्याय 13: Suratha-Vaiśyayor Varapradāna — सुरथवैश्ययोर्वरप्रदानमार्कण्डेय उवाच इति दत्त्वा तयोर्देवी यथाभिलषितं वरम् ॥
🔊 किसी भी शब्द को सुनने के लिए टैप करें — या पूरा श्लोक सुनने के लिए ▶ दबाएँ
लिप्यंतरण
mārkaṇḍeya uvāca iti dattvā tayordevī yathābhilaṣitaṃ varam
अर्थ
(मार्कण्डेय बोले —) इस प्रकार उन दोनों को यथेच्छ वर देकर देवी,
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
दुर्गा सप्तशती 13.21 का अर्थ क्या है?▼
(मार्कण्डेय बोले —) इस प्रकार उन दोनों को यथेच्छ वर देकर देवी,
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?▼
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 13 (Suratha-Vaiśyayor Varapradāna — सुरथ व वैश्य को वरदान) का 21वाँ श्लोक है।