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दुर्गा सप्तशती 13.20

अध्याय 13, श्लोक 20

अध्याय 13: Suratha-Vaiśyayor Varapradānaसुरथवैश्ययोर्वरप्रदान

तं प्रयच्छामि संसिद्ध्यै तव ज्ञानं भविष्यति

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लिप्यंतरण

taṃ prayacchāmi saṃsiddhyai tava jñānaṃ bhaviṣyati

अर्थ

वह मैं तुम्हारी सिद्धि के लिए प्रदान करती हूँ: तुम्हें ज्ञान प्राप्त होगा।'

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दुर्गा सप्तशती 13.20 का अर्थ क्या है?
वह मैं तुम्हारी सिद्धि के लिए प्रदान करती हूँ: तुम्हें ज्ञान प्राप्त होगा।'
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 13 (Suratha-Vaiśyayor Varapradāna — सुरथ व वैश्य को वरदान) का 20वाँ श्लोक है।