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दुर्गा सप्तशती 13.19

अध्याय 13, श्लोक 19

अध्याय 13: Suratha-Vaiśyayor Varapradānaसुरथवैश्ययोर्वरप्रदान

वैश्यवर्य त्वया यश्च वरोऽस्मत्तोऽभिवाञ्छितः

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लिप्यंतरण

vaiśyavarya tvayā yaśca varo'smatto'bhivāñchitaḥ

अर्थ

और हे वैश्यश्रेष्ठ! तुमने मुझसे जो वर चाहा है —

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दुर्गा सप्तशती 13.19 का अर्थ क्या है?
और हे वैश्यश्रेष्ठ! तुमने मुझसे जो वर चाहा है —
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 13 (Suratha-Vaiśyayor Varapradāna — सुरथ व वैश्य को वरदान) का 19वाँ श्लोक है।