Mantra.Tips
दुर्गा सप्तशती 13.17

अध्याय 13, श्लोक 17

अध्याय 13: Suratha-Vaiśyayor Varapradānaसुरथवैश्ययोर्वरप्रदान

मृतश्च भूयः सम्प्राप्य जन्म देवाद्विवस्वतः

🔊 किसी भी शब्द को सुनने के लिए टैप करें — या पूरा श्लोक सुनने के लिए ▶ दबाएँ

लिप्यंतरण

mṛtaśca bhūyaḥ samprāpya janma devādvivasvataḥ

अर्थ

और मृत्यु के पश्चात् पुनः सूर्य (विवस्वान्) देव से जन्म पाकर,

इस श्लोक को साझा करें
Share:

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दुर्गा सप्तशती 13.17 का अर्थ क्या है?
और मृत्यु के पश्चात् पुनः सूर्य (विवस्वान्) देव से जन्म पाकर,
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 13 (Suratha-Vaiśyayor Varapradāna — सुरथ व वैश्य को वरदान) का 17वाँ श्लोक है।