अध्याय 13, श्लोक 16
अध्याय 13: Suratha-Vaiśyayor Varapradāna — सुरथवैश्ययोर्वरप्रदानहत्वा रिपूनस्खलितं तव तत्र भविष्यति ॥
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लिप्यंतरण
hatvā ripūnaskhalitaṃ tava tatra bhaviṣyati
अर्थ
शत्रुओं का वध करके वह राज्य वहाँ आपको अविचल रूप से प्राप्त होगा।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
दुर्गा सप्तशती 13.16 का अर्थ क्या है?▼
शत्रुओं का वध करके वह राज्य वहाँ आपको अविचल रूप से प्राप्त होगा।
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?▼
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 13 (Suratha-Vaiśyayor Varapradāna — सुरथ व वैश्य को वरदान) का 16वाँ श्लोक है।