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दुर्गा सप्तशती 13.15

अध्याय 13, श्लोक 15

अध्याय 13: Suratha-Vaiśyayor Varapradānaसुरथवैश्ययोर्वरप्रदान

देव्युवाच स्वल्पैरहोभिर्नृपते स्वं राज्यं प्राप्स्यते भवान्

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लिप्यंतरण

devyuvāca svalpairahobhirnṛpate svaṃ rājyaṃ prāpsyate bhavān

अर्थ

(देवी बोलीं —) 'हे नृपते! थोड़े ही दिनों में आप अपना राज्य प्राप्त कर लेंगे।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दुर्गा सप्तशती 13.15 का अर्थ क्या है?
(देवी बोलीं —) 'हे नृपते! थोड़े ही दिनों में आप अपना राज्य प्राप्त कर लेंगे।
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 13 (Suratha-Vaiśyayor Varapradāna — सुरथ व वैश्य को वरदान) का 15वाँ श्लोक है।