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दुर्गा सप्तशती 13.13

अध्याय 13, श्लोक 13

अध्याय 13: Suratha-Vaiśyayor Varapradānaसुरथवैश्ययोर्वरप्रदान

मार्कण्डेय उवाच ततो वव्रे नृपो राज्यमविभ्रंश्यन्यजन्मनि अत्रैव निजं राज्यं हतशत्रुबलं बलात्

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लिप्यंतरण

mārkaṇḍeya uvāca tato vavre nṛpo rājyamavibhraṃśyanyajanmani atraiva ca nijaṃ rājyaṃ hataśatrubalaṃ balāt

अर्थ

(मार्कण्डेय बोले —) तब राजा ने दूसरे जन्म में अविनाशी राज्य, और इसी जन्म में बलपूर्वक शत्रुओं का बल नष्ट कर अपना राज्य माँगा।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दुर्गा सप्तशती 13.13 का अर्थ क्या है?
(मार्कण्डेय बोले —) तब राजा ने दूसरे जन्म में अविनाशी राज्य, और इसी जन्म में बलपूर्वक शत्रुओं का बल नष्ट कर अपना राज्य माँगा।
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 13 (Suratha-Vaiśyayor Varapradāna — सुरथ व वैश्य को वरदान) का 13वाँ श्लोक है।