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दुर्गा सप्तशती 13.11

अध्याय 13, श्लोक 11

अध्याय 13: Suratha-Vaiśyayor Varapradānaसुरथवैश्ययोर्वरप्रदान

परितुष्टा जगद्धात्री प्रत्यक्षं प्राह चण्डिका

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लिप्यंतरण

parituṣṭā jagaddhātrī pratyakṣaṃ prāha caṇḍikā

अर्थ

जगद्धात्री चण्डिका परम प्रसन्न होकर प्रत्यक्ष प्रकट होकर उनसे बोलीं:

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दुर्गा सप्तशती 13.11 का अर्थ क्या है?
जगद्धात्री चण्डिका परम प्रसन्न होकर प्रत्यक्ष प्रकट होकर उनसे बोलीं:
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 13 (Suratha-Vaiśyayor Varapradāna — सुरथ व वैश्य को वरदान) का 11वाँ श्लोक है।