अध्याय 13, श्लोक 1
अध्याय 13: Suratha-Vaiśyayor Varapradāna — सुरथवैश्ययोर्वरप्रदानॐ ऋषिरुवाच एतत्ते कथितं भूप देवीमाहात्म्यमुत्तमम् । एवं प्रभावा सा देवी ययेदं धार्यते जगत् ॥
🔊 किसी भी शब्द को सुनने के लिए टैप करें — या पूरा श्लोक सुनने के लिए ▶ दबाएँ
लिप्यंतरण
oṃ ṛṣiruvāca etatte kathitaṃ bhūpa devīmāhātmyamuttamam evaṃ prabhāvā sā devī yayedaṃ dhāryate jagat
अर्थ
(ॐ। ऋषि बोले —) 'हे राजन्! देवी का यह उत्तम माहात्म्य आपको कह सुनाया। ऐसे प्रभाव वाली हैं वे देवी, जिनसे यह जगत् धारण किया जाता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
दुर्गा सप्तशती 13.1 का अर्थ क्या है?▼
(ॐ। ऋषि बोले —) 'हे राजन्! देवी का यह उत्तम माहात्म्य आपको कह सुनाया। ऐसे प्रभाव वाली हैं वे देवी, जिनसे यह जगत् धारण किया जाता है।
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?▼
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 13 (Suratha-Vaiśyayor Varapradāna — सुरथ व वैश्य को वरदान) का 1वाँ श्लोक है।