अध्याय 12, श्लोक 39
अध्याय 12: Bhagavatī Vākya (Phalaśruti) — भगवतीवाक्य (फलश्रुति)स्तुता सम्पूजिता पुष्पैर्गन्धधूपादिभिस्तथा । ददाति वित्तं पुत्रांश्च मतिं धर्मे गतिं शुभाम् ॥
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लिप्यंतरण
stutā sampūjitā puṣpairgandhadhūpādibhistathā dadāti vittaṃ putrāṃśca matiṃ dharme gatiṃ śubhām
अर्थ
पुष्प, गन्ध, धूप आदि से स्तुति और पूजन किए जाने पर वे धन और पुत्र, धर्म में बुद्धि तथा शुभ गति प्रदान करती हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
दुर्गा सप्तशती 12.39 का अर्थ क्या है?▼
पुष्प, गन्ध, धूप आदि से स्तुति और पूजन किए जाने पर वे धन और पुत्र, धर्म में बुद्धि तथा शुभ गति प्रदान करती हैं।
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?▼
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 12 (Bhagavatī Vākya (Phalaśruti) — भगवती वाक्य — फलश्रुति) का 39वाँ श्लोक है।