अध्याय 12, श्लोक 38
अध्याय 12: Bhagavatī Vākya (Phalaśruti) — भगवतीवाक्य (फलश्रुति)भवकाले नृणां सैव लक्ष्मीर्वृद्धिप्रदा गृहे । सैवाभावे तथालक्ष्मीर्विनाशायोपजायते ॥
🔊 किसी भी शब्द को सुनने के लिए टैप करें — या पूरा श्लोक सुनने के लिए ▶ दबाएँ
लिप्यंतरण
bhavakāle nṛṇāṃ saiva lakṣmīrvṛddhipradā gṛhe saivābhāve tathālakṣmīrvināśāyopajāyate
अर्थ
अभ्युदय के समय वे मनुष्यों के घर में वृद्धि देने वाली लक्ष्मी हैं; और अभाव (दुर्भाग्य) के समय वे ही अलक्ष्मी होकर विनाश के लिए प्रकट होती हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
दुर्गा सप्तशती 12.38 का अर्थ क्या है?▼
अभ्युदय के समय वे मनुष्यों के घर में वृद्धि देने वाली लक्ष्मी हैं; और अभाव (दुर्भाग्य) के समय वे ही अलक्ष्मी होकर विनाश के लिए प्रकट होती हैं।
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?▼
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 12 (Bhagavatī Vākya (Phalaśruti) — भगवती वाक्य — फलश्रुति) का 38वाँ श्लोक है।