अध्याय 12, श्लोक 37
अध्याय 12: Bhagavatī Vākya (Phalaśruti) — भगवतीवाक्य (फलश्रुति)सैव काले महामारी सैव सृष्टिर्भवत्यजा । स्थितिं करोति भूतानां सैव काले सनातनी ॥
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लिप्यंतरण
saiva kāle mahāmārī saiva sṛṣṭirbhavatyajā sthitiṃ karoti bhūtānāṃ saiva kāle sanātanī
अर्थ
वही समय आने पर महामारी हैं, वही अजन्मा सृष्टि हैं; और वही सनातनी समय पर प्राणियों की स्थिति (पालन) करती हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
दुर्गा सप्तशती 12.37 का अर्थ क्या है?▼
वही समय आने पर महामारी हैं, वही अजन्मा सृष्टि हैं; और वही सनातनी समय पर प्राणियों की स्थिति (पालन) करती हैं।
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?▼
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 12 (Bhagavatī Vākya (Phalaśruti) — भगवती वाक्य — फलश्रुति) का 37वाँ श्लोक है।